महाभारत 3.199.7
राज्ञो महानसे पूर्वं रन्तिदेवस्य वै द्विजद्वे सहस्रे तु वध्येते पशूनामन्वहं तदा
rājño mahānase pūrvaṃ rantidevasya vai dvijadve sahasre tu vadhyete paśūnāmanvahaṃ tadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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