महाभारत 3.20.12
अमृष्यमाणोऽपसव्यं प्रद्युम्नेन स सौभराट्यन्तारमस्य सहसा त्रिभिर्बाणैः समर्पयत्
amṛṣyamāṇo'pasavyaṃ pradyumnena sa saubharāṭyantāramasya sahasā tribhirbāṇaiḥ samarpayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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