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महाभारत 3.200.19
न म्रियेयुर्न जीर्येयुः सर्वे स्युः सार्वकामिकाःनाप्रियं प्रतिपश्येयुर्वशित्वं यदि वै भवेत्
na mriyeyurna jīryeyuḥ sarve syuḥ sārvakāmikāḥnāpriyaṃ pratipaśyeyurvaśitvaṃ yadi vai bhavet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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