महाभारत 3.200.36
ततः कर्म समादत्ते पुनरन्यन्नवं बहुपच्यते तु पुनस्तेन भुक्त्वापथ्यमिवातुरः
tataḥ karma samādatte punaranyannavaṃ bahupacyate tu punastena bhuktvāpathyamivāturaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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