महाभारत 3.200.43
सन्ति ह्यागतविज्ञानाः शिष्टाः शास्त्रविचक्षणाःस्वधर्मेण क्रिया लोके कर्मणः सोऽप्यसंकरः
santi hyāgatavijñānāḥ śiṣṭāḥ śāstravicakṣaṇāḥsvadharmeṇa kriyā loke karmaṇaḥ so'pyasaṃkaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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