महाभारत 3.203.4
मोहात्मकं तमस्तेषां रज एषां प्रवर्तकम्प्रकाशबहुलत्वाच्च सत्त्वं ज्याय इहोच्यते
mohātmakaṃ tamasteṣāṃ raja eṣāṃ pravartakamprakāśabahulatvācca sattvaṃ jyāya ihocyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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