महाभारत 3.205.13
अतन्द्रितः कुरु क्षिप्रं मातापित्रोर्हि पूजनम्अतः परमहं धर्मं नान्यं पश्यामि कंचन
atandritaḥ kuru kṣipraṃ mātāpitrorhi pūjanamataḥ paramahaṃ dharmaṃ nānyaṃ paśyāmi kaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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