महाभारत 3.205.5
व्याध उवाच · vyādha uvāca
यत्तदा त्वं द्विजश्रेष्ठ तयोक्तो मां प्रति प्रभोदृष्टमेतत्तया सम्यगेकपत्न्या न संशयः
yattadā tvaṃ dvijaśreṣṭha tayokto māṃ prati prabhodṛṣṭametattayā samyagekapatnyā na saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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