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महाभारत 3.207.14
अग्निरुवाचनष्टकीर्तिरहं लोके भवाञ्जातो हुताशनःभवन्तमेव ज्ञास्यन्ति पावकं न तु मां जनाः
agniruvācanaṣṭakīrtirahaṃ loke bhavāñjāto hutāśanaḥbhavantameva jñāsyanti pāvakaṃ na tu māṃ janāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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