महाभारत 3.209.24
संहर्षाद्धारयन्क्रोधं धन्वी स्रग्वी रथे स्थितःसमरे नाशयेच्छत्रूनमोघो नाम पावकः
saṃharṣāddhārayankrodhaṃ dhanvī sragvī rathe sthitaḥsamare nāśayecchatrūnamogho nāma pāvakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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