महाभारत 3.21.12
सैन्यसुग्रीवयुक्तेन रथेनानादयन्दिशःप्रध्माप्य शङ्खप्रवरं पाञ्चजन्यमहं नृप
sainyasugrīvayuktena rathenānādayandiśaḥpradhmāpya śaṅkhapravaraṃ pāñcajanyamahaṃ nṛpa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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