महाभारत 3.21.17
स समालोक्य दूरान्मां स्मयन्निव युधिष्ठिरआह्वयामास दुष्टात्मा युद्धायैव मुहुर्मुहुः
sa samālokya dūrānmāṃ smayanniva yudhiṣṭhiraāhvayāmāsa duṣṭātmā yuddhāyaiva muhurmuhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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