महाभारत 3.21.8अप्रमादः सदा कार्यो नगरे यादवर्षभाःशाल्वराजविनाशाय प्रयातं मां निबोधतapramādaḥ sadā kāryo nagare yādavarṣabhāḥśālvarājavināśāya prayātaṃ māṃ nibodhataइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें