महाभारत 3.211.13
इन्द्रेण सहितं यस्य हविराग्रयणं स्मृतम्अग्निराग्रयणो नाम भानोरेवान्वयस्तु सः
indreṇa sahitaṃ yasya havirāgrayaṇaṃ smṛtamagnirāgrayaṇo nāma bhānorevānvayastu saḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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