महाभारत 3.211.15
निशां त्वजनयत्कन्यामग्नीषोमावुभौ तथामनोरेवाभवद्भार्या सुषुवे पञ्च पावकान्
niśāṃ tvajanayatkanyāmagnīṣomāvubhau tathāmanorevābhavadbhāryā suṣuve pañca pāvakān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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