महाभारत 3.211.8
तपसश्च मनुं पुत्रं भानुं चाप्यङ्गिरासृजत्बृहद्भानुं तु तं प्राहुर्ब्राह्मणा वेदपारगाः
tapasaśca manuṃ putraṃ bhānuṃ cāpyaṅgirāsṛjatbṛhadbhānuṃ tu taṃ prāhurbrāhmaṇā vedapāragāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें