महाभारत 3.212.17
तस्मिन्नष्टे जगद्भीतमथर्वाणमथाश्रितम्अर्चयामासुरेवैनमथर्वाणं सुरर्षयः
tasminnaṣṭe jagadbhītamatharvāṇamathāśritamarcayāmāsurevainamatharvāṇaṃ surarṣayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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