महाभारत 3.212.27
एवमेते महात्मानः कीर्तितास्तेऽग्नयो मयाअप्रमेया यथोत्पन्नाः श्रीमन्तस्तिमिरापहाः
evamete mahātmānaḥ kīrtitāste'gnayo mayāaprameyā yathotpannāḥ śrīmantastimirāpahāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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