महाभारत 3.213.28
लोहितैश्च घनैर्युक्तां पूर्वां संध्यां शतक्रतुःअपश्यल्लोहितोदं च भगवान्वरुणालयम्
lohitaiśca ghanairyuktāṃ pūrvāṃ saṃdhyāṃ śatakratuḥapaśyallohitodaṃ ca bhagavānvaruṇālayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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