महाभारत 3.214.10
सुपर्णी सा तदा भूत्वा निर्जगाम महावनात्अपश्यत्पर्वतं श्वेतं शरस्तम्बैः सुसंवृतम्
suparṇī sā tadā bhūtvā nirjagāma mahāvanātapaśyatparvataṃ śvetaṃ śarastambaiḥ susaṃvṛtam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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