महाभारत 3.214.2
मामग्ने कामसंतप्तां त्वं कामयितुमर्हसिकरिष्यसि न चेदेवं मृतां मामुपधारय
māmagne kāmasaṃtaptāṃ tvaṃ kāmayitumarhasikariṣyasi na cedevaṃ mṛtāṃ māmupadhāraya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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