महाभारत 3.214.34
सा तदा विपुला शक्तिः क्षिप्ता तेन महात्मनाबिभेद शिखरं घोरं श्वेतस्य तरसा गिरेः
sā tadā vipulā śaktiḥ kṣiptā tena mahātmanābibheda śikharaṃ ghoraṃ śvetasya tarasā gireḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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