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महाभारत 3.218.29
अनुप्रविश्य रुद्रेण वह्निं जातो ह्ययं शिशुःतत्र जातस्ततः स्कन्दो रुद्रसूनुस्ततोऽभवत्
anupraviśya rudreṇa vahniṃ jāto hyayaṃ śiśuḥtatra jātastataḥ skando rudrasūnustato'bhavat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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