महाभारत 3.218.35
निकृन्तनं च शत्रूणां लोकानां चाभिरक्षणम्स्कन्देन सह जातानि सर्वाण्येव जनाधिप
nikṛntanaṃ ca śatrūṇāṃ lokānāṃ cābhirakṣaṇamskandena saha jātāni sarvāṇyeva janādhipa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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