महाभारत 3.219.2
ऋषिभिः संपरित्यक्ता धर्मयुक्ता महाव्रताःद्रुतमागम्य चोचुस्ता देवसेनापतिं प्रभुम्
ṛṣibhiḥ saṃparityaktā dharmayuktā mahāvratāḥdrutamāgamya cocustā devasenāpatiṃ prabhum
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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