महाभारत 3.219.3
वयं पुत्र परित्यक्ता भर्तृभिर्देवसंमितैःअकारणाद्रुषा तात पुण्यस्थानात्परिच्युताः
vayaṃ putra parityaktā bhartṛbhirdevasaṃmitaiḥakāraṇādruṣā tāta puṇyasthānātparicyutāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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