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महाभारत 3.219.7
मार्कण्डेय उवाच · mārkaṇḍeya uvāca
एवमुक्ते ततः शक्रं किं कार्यमिति सोऽब्रवीत्उक्तः स्कन्देन ब्रूहीति सोऽब्रवीद्वासवस्ततः
evamukte tataḥ śakraṃ kiṃ kāryamiti so'bravītuktaḥ skandena brūhīti so'bravīdvāsavastataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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