महाभारत 3.22.10
अथ मां पुरुषः कश्चिद्द्वारकानिलयोऽब्रवीत्त्वरितो रथमभ्येत्य सौहृदादिव भारत
atha māṃ puruṣaḥ kaściddvārakānilayo'bravīttvarito rathamabhyetya sauhṛdādiva bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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