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महाभारत 3.22.18
बलदेवो महाबाहुः कच्चिज्जीवति शत्रुहासात्यकी रौक्मिणेयश्च चारुदेष्णश्च वीर्यवान्साम्बप्रभृतयश्चैवेत्यहमासं सुदुर्मनाः
baladevo mahābāhuḥ kaccijjīvati śatruhāsātyakī raukmiṇeyaśca cārudeṣṇaśca vīryavānsāmbaprabhṛtayaścaivetyahamāsaṃ sudurmanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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