महाभारत 3.22.23
तस्य रूपं प्रपततः पितुर्मम नराधिपययातेः क्षीणपुण्यस्य स्वर्गादिव महीतलम्
tasya rūpaṃ prapatataḥ piturmama narādhipayayāteḥ kṣīṇapuṇyasya svargādiva mahītalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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