महाभारत 3.22.4ततः शतसहस्रेण शराणां नतपर्वणाम्दारुकं वाजिनश्चैव रथं च समवाकिरत्tataḥ śatasahasreṇa śarāṇāṃ nataparvaṇāmdārukaṃ vājinaścaiva rathaṃ ca samavākiratइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें