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महाभारत 3.220.26
तत्र दिव्याश्च गन्धर्वा नृत्यन्त्यप्सरसस्तथाहृष्टानां तत्र भूतानां श्रूयते निनदो महान्
tatra divyāśca gandharvā nṛtyantyapsarasastathāhṛṣṭānāṃ tatra bhūtānāṃ śrūyate ninado mahān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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