महाभारत 3.221.12
पृष्ठतो विजयस्यापि याति रुद्रस्य पट्टिशःगदामुसलशक्त्याद्यैर्वृतः प्रहरणोत्तमैः
pṛṣṭhato vijayasyāpi yāti rudrasya paṭṭiśaḥgadāmusalaśaktyādyairvṛtaḥ praharaṇottamaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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