महाभारत 3.221.4
तस्मिन्रथे पशुपतिः स्थितो भात्युमया सहविद्युता सहितः सूर्यः सेन्द्रचापे घने यथा
tasminrathe paśupatiḥ sthito bhātyumayā sahavidyutā sahitaḥ sūryaḥ sendracāpe ghane yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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