महाभारत 3.221.53
ते तं घनैरिवादित्यं दृष्ट्वा संपरिवारितम्समुद्यतगिरिं राजन्व्यद्रवन्त दिवौकसः
te taṃ ghanairivādityaṃ dṛṣṭvā saṃparivāritamsamudyatagiriṃ rājanvyadravanta divaukasaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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