महाभारत 3.222.35
पत्याश्रयो हि मे धर्मो मतः स्त्रीणां सनातनःस देवः सा गतिर्नान्या तस्य का विप्रियं चरेत्
patyāśrayo hi me dharmo mataḥ strīṇāṃ sanātanaḥsa devaḥ sā gatirnānyā tasya kā vipriyaṃ caret
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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