महाभारत 3.222.36
अहं पतीन्नातिशये नात्यश्ने नातिभूषयेनापि परिवदे श्वश्रूं सर्वदा परियन्त्रिता
ahaṃ patīnnātiśaye nātyaśne nātibhūṣayenāpi parivade śvaśrūṃ sarvadā pariyantritā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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