महाभारत 3.222.38
नित्यमार्यामहं कुन्तीं वीरसूं सत्यवादिनीम्स्वयं परिचराम्येका स्नानाच्छादनभोजनैः
nityamāryāmahaṃ kuntīṃ vīrasūṃ satyavādinīmsvayaṃ paricarāmyekā snānācchādanabhojanaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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