महाभारत 3.222.44
शतं दासीसहस्राणि कौन्तेयस्य महात्मनःकम्बुकेयूरधारिण्यो निष्ककण्ठ्यः स्वलंकृताः
śataṃ dāsīsahasrāṇi kaunteyasya mahātmanaḥkambukeyūradhāriṇyo niṣkakaṇṭhyaḥ svalaṃkṛtāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें