महाभारत 3.222.55
अनिशायां निशायां च सहायाः क्षुत्पिपासयोःआराधयन्त्याः कौरव्यांस्तुल्या रात्रिरहश्च मे
aniśāyāṃ niśāyāṃ ca sahāyāḥ kṣutpipāsayoḥārādhayantyāḥ kauravyāṃstulyā rātrirahaśca me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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