महाभारत 3.226.22
एवमुक्त्वा तु राजानं कर्णः शकुनिना सहतूष्णीं बभूवतुरुभौ वाक्यान्ते जनमेजय
evamuktvā tu rājānaṃ karṇaḥ śakuninā sahatūṣṇīṃ babhūvaturubhau vākyānte janamejaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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