महाभारत 3.227.18
ततो दुर्योधनं कर्णः प्रहसन्निदमब्रवीत्उपायः परिदृष्टोऽयं तं निबोध जनेश्वर
tato duryodhanaṃ karṇaḥ prahasannidamabravītupāyaḥ paridṛṣṭo'yaṃ taṃ nibodha janeśvara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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