महाभारत 3.227.7
तानि पूर्वाणि वाक्यानि यच्चान्यत्परिदेवितम्विचिन्त्य नाधिगच्छामि गमनायेतराय वा
tāni pūrvāṇi vākyāni yaccānyatparidevitamvicintya nādhigacchāmi gamanāyetarāya vā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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