महाभारत 3.229.9
स स्त्रीगणवृतो राजा प्रहृष्टः प्रददौ वसुतेभ्यो यथार्हमन्नानि पानानि विविधानि च
sa strīgaṇavṛto rājā prahṛṣṭaḥ pradadau vasutebhyo yathārhamannāni pānāni vividhāni ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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