महाभारत 3.23.25
नैष मार्दवसाध्यो वै मतो नापि सखा तवयेन त्वं योधितो वीर द्वारका चावमर्दिता
naiṣa mārdavasādhyo vai mato nāpi sakhā tavayena tvaṃ yodhito vīra dvārakā cāvamarditā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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