महाभारत 3.23.7
तस्मिन्नुपरते शब्दे पुनरेवान्यतोऽभवत्शब्दोऽपरो महाराज तत्रापि प्राहरं शरान्
tasminnuparate śabde punarevānyato'bhavatśabdo'paro mahārāja tatrāpi prāharaṃ śarān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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