महाभारत 3.231.7
तस्मिन्गृहीते राजेन्द्र स्थितं दुःशासनं रथेपर्यगृह्णन्त गन्धर्वाः परिवार्य समन्ततः
tasmingṛhīte rājendra sthitaṃ duḥśāsanaṃ ratheparyagṛhṇanta gandharvāḥ parivārya samantataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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