महाभारत 3.233.7
न्यवर्तन्त ततः सर्वे गन्धर्वा जितकाशिनःदृष्ट्वा रथगतान्वीरान्पाण्डवांश्चतुरो रणे
nyavartanta tataḥ sarve gandharvā jitakāśinaḥdṛṣṭvā rathagatānvīrānpāṇḍavāṃścaturo raṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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