महाभारत 3.236.12
शरक्षताङ्गश्च भृशं व्यपयातोऽभिपीडितःइदं त्वत्यद्भुतं मन्ये यद्युष्मानिह भारत
śarakṣatāṅgaśca bhṛśaṃ vyapayāto'bhipīḍitaḥidaṃ tvatyadbhutaṃ manye yadyuṣmāniha bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें