महाभारत 3.238.2
भ्रातॄनर्हसि नो वीर मोक्तुं गन्धर्वसत्तमअनर्हा धर्षणं हीमे जीवमानेषु पाण्डुषु
bhrātṝnarhasi no vīra moktuṃ gandharvasattamaanarhā dharṣaṇaṃ hīme jīvamāneṣu pāṇḍuṣu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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